पन्ना : गत वर्ष जिले में भारी बारिस के चलते बिलखुरा सिरस्वाहा बांध फूट गये थे। इसके अलावा दर्जनों तालाबों और डेम का पानी निकालकर उन्हे टूटने से बचाया गया था। टूटे हूये और टूटने से बचे हुये तालाबों और बांधो का मरम्मत कार्य बारिश होने से पूर्व तक नही किया गया। इससे करोड़ो की लागत से बने इस बांधो का उपयोग भी जल संरक्षण के लिये नही हो पायेगा किसानो और क्षेत्र की जनता के लिये बेकाम सावित ही रहेगें। गत वर्ष बिलखुरा और सिरस्वाहा डेम फूट गये थे जिसके डर से बांध के नीचे बसे गांवों केा खाली करना पड़ा था जिसके निमार्ण कार्य में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे हुये थे। जिसको लेकर जिले के दौरे पर आये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मामले की जांच कराने और दोषियों को जेल भेजने की बात कही थी। बाद में बताया गया कि मंबंधित मामले में हाई कोर्ट से स्टे ले आये है। तब से लेकर अब तक न तो उन पर कार्यवाही हो सकी और न ही बारिश प्रारंभ होने के पूर्व बांधों को दुरूस्त ही कराया जा सका।
इसी तरह दो वर्ष पूर्व निर्मित भितरी मुटमुरू बांध पहली बरसात नही झेल पाया था। इस बांध का निर्माण भी करोड़ों की लागत से हुआ था। जो पहली बरसात में ही टूट गया था। इसके टूटे हुूये हिस्से को निःशुल्क बनवाने की शर्त पर संबंधित ठेकेदार व कंपनी को ही बांध बनाने का दायित्व सौंपा था। लेकिन ठेकेदार द्वारा कछुआ गति से कार्य कराने पूर्ण रूप से बांध का निर्माण ही हो सका।
दो वर्ष पूर्व कराये गये सकरिया बांध बिन्द्रावन बांध भिलसाय बांध पूर्ण रूप से औचित्यहीन साबित हुये है। जिनसे किसानों को सिचाई का कोई लाभ नही मिल सका। क्योंकि सकरिया बांध रिसाव के कारण अक्टूबर-नवम्बर में खाली हो जाता रहा है। तथा विन्द्रावन बांध में नाले के ऊपर बेस्ट वियर बनाये जाने के कारण बांध में भराव नही हो पाता एवं भिलसायें बांध का पूरा पानी बंेस्ट वियर से सीधे नाले में निकास बनाये जाने के कारण बांध में पानी का भराव नही हो पाता है। अक्टूबर- नवम्बर में भिलसायं बांध खेल के मैदान में तब्दील हो जाता है। एंसी स्थ्तिि में क्षेत्र के किसान अपने आप को ठगा महसूस कर रहे है।

रिपोर्ट- रिषी कुमार

0

LEAVE A REPLY