बलिया : रास्ते किसी भी शहर की रूप रेखा तय करती है । रास्ते से ही अपने मंजिल तक जाया जाता है। रास्ते ही किसी शहर की विकाश कि आधारशिला होती है। लेकिन वही रास्ते अगर हादसे को दावत देने लगे तो आप क्या कहेंगे ? खबर बलिया से है जहाँ बलिया का प्रवेश द्वार कहे जाने वाला एनएच 31 से जुड़ा ब्रिज शायद बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है । जरा गौर से देखिये इस जर्जर ब्रिज को, जहां यह ब्रिज अपनी उम्र पूरी करता दिख रहा है वहीं उसपर दिन प्रतिदिन पुल से निकलने वालों की भीड़ बढ़ती जा रही है, प्रतिदिन यहां जाम की स्थिति बनी रहती है। लेकिन स्कूली बच्चो से भरी बसें और पैदल चलते लोग शायद इस बात से अनजान है कि यह पूल चलने लायक है या नही। आपको बता दें कि 28 मई 2016 को पूल का एक हिस्सा टूट कर धराशायी हो गया था, अब पुल के एक ही हिस्से पर पूरा जनपद रेंग रहा है। 23 माह बीत गए लेकिन न किसी राजनेता न किसी आला अधिकारी ने इसकी सुध ली। आपको बता दे कि जिला प्रशासन ने भी अभी तक सर्वे नही करा पाया की क्या पूल चलने लायक है या नही । जब इस बारे में जिला प्रशासन से बात की गयी तो उनका कहना है की यह हम लोगों के अधिकार क्षेत्र की बात नही है नेषनल हाइवे के अधिकारियो को पत्र भेजा जा रहा है । कुछ महीनो पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी बलिया आये थे ,सड़क के बारे में बहुत सारी घोषणाएं हुयी लोगो की माने तो यह केवल चुनावी जुमला है। केंद्र और राज्य सरकार के पेंच में बलिया की जनता मौत के रास्ते रोज गुजर रही है आलम यह है कि प्रशासन द्वारा कोई चेतावनी भरा नोटिस बोर्ड भी नही लगाया गया है कि यहां से कितने वजन के वाहन का ले जाना प्रतिबंधित है । बहरहाल जो भी हो देखना यह है की बलिया की जनता के अधिकारों को कब तक अनदेखी होती है।

रिपोर्ट-मोमशाद अहमद

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