झाँसी: वैसे अगर शहर में कलाकारों के मंच की बात आती है तो लोगों के ज़हन में सबसे पहले पं. दीनदयाल सभागार का मंच ही याद आता है। यही वह मंच है जिसमें कई वर्षों से कलाकार थियेटर/नाटकों का मंचन करते आ रहे हैं। पर आज़ इस सभागार का हाल बहुत बेहाल है। जी हाँ, आज इसके हालात ऐसे हैं कि लोग इसकी अपेक्षा राजकीय संग्रहालय के प्रेक्षाग्रह में कार्यक्रम कराना उचित समझते हैं, भले उसमें बैठने की व्यवस्था कम है व मंच छोटा है पर सभागार की टूटी पड़ी कुर्सियों से तो अच्छा ही है।

पं. दीनदयाल सभागार की बालकनी की तो सारी सीटें बस नाम के लिये ही रह गयी है, तो वही नीचे की भी ज्यादातर सीटें टूटी ही पड़ी हैं, इस कारण कई दर्शकों को तो खड़े होकर ही कार्यक्रम देखना पड़ता है। जो ठीक ठाक बैठने के लिये सीटें बची भी हैं तो उनकी हालत ऐसी है कि कार्यक्रम के समय उन पर सीट कवर लगाना जरूरी पड़ जाता है तब जाकर इसकी हालत बैठने लायक हो पाती है। बारिश के मौसम में तो इसमें कार्यक्रम करना भी मुश्किल है, बारिश होने पर मंच पर ऊपर से पानी टपकने लगता है, जिससे कार्यक्रम में बाधा आती है। कहने को इसमें कार्यक्रम कराने के लिये 5000 रूपये फीस देनी पड़ती है, तब भी कार्यक्रम संयोजक को इस हालात का सामना करना पड़ता है। शायद यही कारण है कि आजकल लोगों का कार्यक्रम कराने के लिये दीनदयाल सभागार की ओर रूझान कम होता नजर आ रहा है। इसलिये सम्बन्धित विभाग को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है।

रिपोर्ट – शिवम् यादव

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