मऊरानीपुरः मउरानीपुर में मनरेगा योजनाओं पर भ्रष्टाचार की दीमक लग चुकी है। सरकार ने गाँव से पलायन रोकने के लिए मनरेगा योजना चलाई है। लेकिन ग्रामीणों को काम नही मिलता, और मजबूरन उन्हे पलायन करना पड़ता है। इतना ही मनरेगा के तहत मिलने वाला लाभ भी उन्हें नही दिया जाता।

गौरतलब हो कि सरकार देश से गरीबी मिटाने के कितने भी दावे कर ले, गरीबों के लिए कितनी भी योजनाऐं चलाएं लेकिन देश से गरीबी मिटना तब तक सम्भव नही है जब तक यहां भ्रष्टाचार का दीमक है। मऊरानीपुर में कुछ ऐसी ही तश्वीर देखने को मिली। पलायन को रोकने के लिए सरकार ने मनरेगा योजना चलाई, ताकि ग्रामीणों को उनके ही गांव में काम मिले, लेकिन मनरेगा भी भष्टाचार की भेंट चढ़ गया। गांव में रहने वाले गोपाल का कहना है कि मनरेगा के तहत उसका जॉब कार्ड 11 साल पहले बना था लेकिन उसे आज तक काम नही मिला साथ ही उसके खाते में 5 हजार रुपए आए थे। लेकिन उसे मात्र 500 रुपए देकर टरका दिया गया।

ग्रामीणों के कार्ड तो बन गए लेकिन उन्हे काम नही मिलता। ग्रामीणों का कहना है कि जो कार्य मजदूरों से कराने चाहिए उसे जेसीबी कराया जाता है, जिस कारण मजदूरों के काम नही मिल पा रहा है और वो मजबूरन गांव से पलायन कर रहे हैं। वहीं जब न्यूज बुंदेलखंड के पत्रकार रवि परिहार ने ग्राम प्रधान आनंद सिंह पटेल से इस बारे में बात की, तो ग्राम प्रधान ने ग्रामीणों के पलायन की बात तो स्वीकार की लेकिन इस बात से साफ इंकार कर दिया कि ना ही तो उसके पास ग्रामीणों के जॉब कार्ड़ है और न ही ग्रामीणों के खाते से पैसा नही निकाला गया। सोचने वाली बात यह है कि अगर ग्राम प्रधान की बात सही है तो फिर ग्रामीण ऐसा आरोप क्यों लगा रहे हैं और अगर ग्रामीणों को मनरेगा के तहत काम और पैसा मिल रहा है तो ग्रामीण गांव से पलायन क्यों कर रहे हैं।

रिपोर्ट- रवि परिहार

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